Monday, February 21, 2011

-: साधन सूत्र-7 :-

-: साधन सूत्र-7 :-

जीते जी अमर हो जाय

''प्रत्येक क्षण, प्रत्येक श्वांस काल रूपी अग्नि में लगातार जल रहा है। उस पर दृष्टि रख, जीवन की आशा त्याग, मरने से पहले जीते जी मर जाना चाहिए, अर्थात् जीवन तथा मृत्यु के स्वरूप में भेद मिटा देना चाहिए। ऐसा होने पर आपको अपने वास्तविक स्वरूप का बोध अवश्य होगा और ऐसा होने से यह सर्वजगत जो प्रतीत होता है, लय हो जाता है, वही आपका वास्तविक स्वरूप है। इसमें कुछ भी सन्देह नहीं। देह में आत्मबुध्दि का त्याग होने पर जीवन और मृत्यु में भेद नहीं रहता, ऐसा अनुभव करने वाले महापुरुषों का कथन है।''


- ब्रह्मलीन संत परमपूज्य स्वामी शरणानन्द जी महाराज


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