-: साधन सूत्र-17 :-
सहज-सुन्दर जीवन के सूत्र
1. उस सुख का त्याग कर दो जो किसी का दु:ख हो।
2. परदोष दर्शन के समान, अन्य कोई दोष नहीं।
(नोट: क्योंकि परदोष दर्शन करने वाला व्यक्ति अपने दोष (अपनी भूल) नहीं देख पाता, सो उन्हें मिटा नहीं पाता और इस प्रकार वह दोषरहित, रसरूप जीवन पाने से वंचित रह जाता है। )
3. की हुई भूल पुन: न दोहराने से स्वत: मिट जाती है।
4. अपने दु:ख सुख का कारण दूसरों को मानना भूल है।
(नोट: अपने सुख दु:ख का कारण दूसरों को मानने से हम राग और द्वेष में जकड़ते जायेंगे, जो सहज सुन्दर जीवन में बाधक होता है। )
5. वस्तुओं की दासता ही दरिद्रता की जननी है।
6. हे प्रभु कुछ देना ही चाहते हो, तो बस अचाह करके करके अपना प्रेमी बना लो।
7. प्रभु अपने हैं यही भजन है, मेरा कुछ नहीं है यही ज्ञान है, मुझे कुछ नहीं चाहिए यही तप हैं।
-ब्रह्मलीन संत स्वामी शरणानन्द जी महाराज
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