-: साधन सूत्र-8 :-
मानव जीवन की धन्यता
-पूज्य स्वामी पथिक जी
ए मन तुम गाओ गान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम्।
दिखता है भाव महान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम् ॥
चाहे कितना दुख सुख होवे, तू कर्मों से ना विमुख होवे।
निकले अन्तर से तान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम्॥
रहना हो घर में या वन में, चिन्ता न रहे कोई मन में।
है सहज सुलभ सद् ज्ञान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम्॥
सुख साम्राज्य पाये तो क्या, या सर्वस खो जाये तो क्या।
भक्तों को तो अभिमान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम्॥
फल ये ही मानव जीवन का, सम्बन्ध छोड़ धन वैभव का।
पा जाये परम स्थान यहीं, हरि: शरणम् हरि: शरणम्॥
मिलती इससे सच्ची सद्गति है, यह कितनी सुन्दर सम्मति है।
बस रहे 'पथिक' का ध्यान यही, हरि: शरणम् हरि: शरणम्॥
(प्रेषक: श्यामलाल बंसल)
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