-: साधन सूत्र-9 :-
श्री राम का ईश्वरत्व व मनुष्यत्व
'' प्रसंग है भगवान श्री राम का, श्री वाल्मीकी रामायण और श्री रामचरित मानस में, ईश्वरत्व और मनुष्यत्व का वर्णन का।
प्रश्न् है कि हमें किसका अनुगमन करते हुये चलना है।
यद्यपि मैं तो यही कहँगा कि अगर आप दोनों में से एक के साथ आयेंगे तो घाटे में रहेंगे, कि और दोनों को स्वीकार करेंगे तो दुहरा लाभ होगा। श्री राम को अगर आप केवल ईश्वर मानेंगे, मनुष्य नहीं स्वीकार करेंगे, तो जीवन में उनके चरित्र से शिक्षा ग्रहण नहीं करेंगे। और दूसरी ओर अगर आप उनको मात्र मनुष्य ही मानेंगे तो फिर समस्या यह है कि मनुष्यों के अगणित चरित्र इतिहास में विद्यमान हैं ही, परन्तु हमें तो ऐसे पात्र की आवश्यकता है जो इतना शर्क्तिमान हो कि अपने चरित्र को जीवन में उतारने की शक्ति हमें दे सके। श्री राम को यदि केवल मनुष्य मानेंगे, तब तो केवल भूतकाल के पात्र होंगे।......
इसका उपाय यही है कि श्री राम के ईश्वरत्व से शक्ति लीजिये, तथा मनुष्यत्व से प्रेरणा लीजिये।“
- ब्रह्मलीन परमपूज्य रामकिंकर जी,
“सुन्दरकाण्ड की सुन्दरता” नामक पुस्तक में
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